(बदनाम खबरची)धारा 370-भाजपा संस्थापक स्व.मुखर्जी के सपनों को किया पूरा।






                                        धारा 370-भाजपा संस्थापक स्व.मुखर्जी के सपनों को किया पूरा।


                                 देश में जश्न का माहौल,मोदी-शाह की जोड़ी की चौतरफ़ा वाह-वाह।


भाजपा नीत मोदी सरकार ने एक झटके से धारा 370 एवं 35ए को समाप्त करके देश की राजनीति में भूचाल ला दिया धारा 370 समाप्त करने के फैसले का विपक्षी पार्टियों को ही नहीं स्वयं भाजपा नेताओं को भी इतनी जल्दी इस पर एक्शन लिया जाएगा की संभावना नहीं थी? फैसले को चंद राजनीतिक दलों को छोड़ कर पूरे देश ने हाथों हाथ लिया है, देश में जश्न का माहौल है,जनता में उत्साह और मोदी-शाह की जोड़ी की चौतरफ़ा वाह वाह हो रही है, विरोधी भी सरकार के कदम की प्रशंसा करते दिखाई दे रहे है, समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों ने सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है।
धारा 370 पर हमेशा देश की राजनीति में उबाल आता रहा है,भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्ता दी गई थीं, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह जब जम्मू-कश्मीर का विलय भारतीय गणराज्य में कर रहे थे तो उस वक्त उन्होंने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन नाम के दस्तावेज पर साइन किया था, अनुच्छेद 370 इसी के अंतर्गत आता था,इसके प्रावधानों को शेख अब्दुला ने तैयार किया था, जिन्हें उस वक्त महाराजा हरि सिंह और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था, इस धारा का विरोध उस समय कांग्रेस में भी हुआ था, पं. नेहरू के समर्थन में और शेख अब्दुला के मंत्रिमंडल से विचार विमर्श के बाद भारतीय संविधान सभा के सदस्य रहे गोपाल स्वामी अय्यंगार ने अनुच्छेद 370 की योजना बनवाई, जो भारत के साथ कश्मीर राज्य के सम्बन्ध की व्याख्या करता है,जब इस अनुच्छेद को संविधान सभा में रखा गया तब नेहरू अमेरिका में थे, लेकिन फार्मूले के मसौदे पर पहले ही उनकी स्वीकृति ले ली गई थी,सरदार पटेल के पत्र बताते है, कि इस संबंध में उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया था,संविधान सभा में अनुच्छेद के मसौदे का उस समय खुद कांग्रेस ने जोरदार बल्कि हिंसक ढंग से विरोध किया था, क्योंकि यह अनुच्छेद कश्मीर राज्य को एक विशेष दर्जा प्रदान करता था,सैद्धांतिक रूप से कांग्रेस की यह राय थी कि कश्मीर भी उन्हीं मूलभूत व्यवस्थाओं अर्थात शर्तों के आधार पर संविधान को स्वीकार करे, जिन शर्तों पर अन्य राज्यों ने उसे स्वीकार किया है,पार्टी ने इस शर्त का विशेष रूप से जबरदस्त विरोध किया कि संविधान गत मूलभूत धाराएं यानी बुनियादी अधिकारों, संबंधी धाराएं कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होगीं, गोपाल स्वामी अयंगार यह बात पार्टी के अन्य नेताओं को समझा नहीं सके थे, संविधान सभा के सदस्य गोपाल स्वामी अयंगार ने पार्टी द्वारा स्वीकृति अनुच्छेद के मसौदे में कुछ फेरबदल कराना चाहा तो सरदार पटेल ने 16 अक्टूबर 1949 को श्री अय्यंगार को लिखे पत्र में कहा कि जब हमारी पार्टी ने शेख साहब की हाजिरी में सारी व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है तो उसके बाद उसमें परिवर्तन करना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं,अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिह्न भी है, हालांकि 370 में समय के साथ-साथ कई बदलाव भी किए गए है 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था,उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री हुआ करता था 'भारतीय जन संघ' बाद में भाजपा के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 के खिलाफ लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया था,श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस संवैधानिक प्रावधान के पूरी तरह ख़िलाफ़ थे, उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है, यही नहीं मुखर्जी का यह भी मानना था कि यह धारा शेख अब्दुल्ला के 'तीन राष्ट्रों के सिद्धांत' को लागू करने की एक योजना है,स्व.मुखर्जी 1953 में भारत प्रशासित कश्मीर के दौरे पर गए थे, वहां तब यह क़ानून लागू था कि भारतीय नागरिक जम्मू कश्मीर में नहीं बस सकते और वहां उन्हें अपने साथ पहचान पत्र रखना ज़रूरी था, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तब इस क़ानून के खिलाफ भूख हड़ताल की थी,वह जम्मू-कश्मीर जाकर अपनी लड़ाई जारी रखना चाहते थे लेकिन उन्हें जम्मू-कश्मीर के भीतर घुसने नहीं दिया गया,उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, 23 जून 1953 को हिरासत के दौरान उनकी मौत हो गई, पहचान पत्र के प्रावधान को बाद में रद्द कर दिया गया,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह की जोड़ी ने जम्मू कश्मीर के विवादित कानून को समाप्त करके अपनी पार्टी के संस्थापक स्व.श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि ही नहीं दी बल्कि उनके विचारों को आगे बढ़ाया है, जम्मू कश्मीर अब तरक्की और खुशहाली का नया इतिहास लिखेगा, मोदी-शाह की जोड़ी का यह कदम इतिहास के पन्नों पर लिख गया है।



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                                                           हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं


                                                           हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं 



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