(बदनाम खबरची) गाल बजाते मुस्लिम नेता अशिक्षा व ग़रीबी के दौर से गुजरता समाज।






 

गाल बजाते मुस्लिम नेता अशिक्षा व ग़रीबी के दौर से गुजरता समाज।

 

राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देने का आदेश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया है,इस आदेश के बाद भी मुस्लिम सियासतदा उपाउपोह की स्थिति में है, कि जगह ले अथवा ना ले,मुस्लिम समाज को अपनी बपौती मानने वाले तथाकथित स्वयंभू मुस्लिम नेता लगातार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अपनी राजनीति चमकाने के प्रयास में लगे हैं एवं ऊलजलूल ब्यान दे रहे हैं। जैसे कि मुस्लिम समाज सरकार की जमीन का मोहताज नहीं है,वह गरीब नहीं है उसके पास अरबों रुपए की वक़्फ संपत्तियां पड़ी है आदि आदि.... मैं इन तथाकथित मुस्लिम नेताओं से मालूम करना चाहता हूं कि यदि मुस्लिम समाज इतना ही साधन संपन्न है, तो वह आज भी गरीबी की रेखा से नीचे क्यों जी रहा है, इन नेताओं ने कितने स्कूल कॉलेज बनाए हैं, कितनी चैरिटी यह लोग करते हैं,कितने अस्पताल गरीब मुसलमानों के इलाज के लिए खोले हैं शायद कुछ नहीं ? आज भी मुस्लिम समाज इन कठमुल्लाओं के चुंगल में फंसकर अशिक्षा का दंश झेल रहा है, इतना ही नहीं मुस्लिम समाज की रीड़ एवं रहबर माने जाने वाले मस्जिदों के इमाम भी आर्थिक रूप से बुरी स्थिति में है, वह मंहगाई के दौर में आज भी मस्जिदों में सात से लेकर दस हजार तक की नौकरी करने के लिए बाध्य हैं, क्या  आठ-दस हजार में परिवार चलाया जा सकता है ?,मुस्लिम समाज अपनी गरीबी व बेबसी के चलते सरकारी अस्पतालों में भारी संख्या में देखें जा सकते है,समाज के अधिकतर युवा रिक्शा चालक,कबाड़ी,फ़ेरी लगाने से लेकर टायर पिंचर व मैकेनिक जैसे मजदूरी के काम में लगे हुए हैं, मैं ऐसी कई मुस्लिम बस्तियों को जनता हु,जिनकी आबादी दो लाख से ज्यादा होने पर भी आज तक एक भी आईएएस,आइपीएस नहीं दे पाई। शर्म आती है ऐसे मुस्लिम नेताओं पर जो अपनी कौम का भला तो कर नहीं पा रहे, उलटे, बरगलाने के नये-नये तरीके निकलते रहते है। हालांकि इन तथाकथित नेताओं को अब मुस्लिम समाज भी गम्भीरता से नहीं लेता,यह लाख दम भरते हो अपने स्वम्भू होने का।

मुस्लिम समाज सदैव देश भक्त रहा है, वह भी देश के अमन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए राम मंदिर निर्माण फैसले का खैरमकदम करता है, हम मुस्लिम समाज के तथाकथित नेताओं से उम्मीद करते है,कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलने वाली पांच एकड़ भूमि को सहर्ष स्वीकार कर वहां एक छोटे से स्थान पर "अयोध्या मस्जिद" का निर्माण कराये,बाकी स्थान पर एक अति आधुनिक अस्पताल बनाये, जिससे 24 घन्टे निःशुल्क चिकित्सा सेवायें उपलब्ध हो,जिसमें वक़्फ संम्पतियो से प्राप्त धन का इस्तेमाल मानव जाति की सेवा के लिए किया जा सकें, मात्र गाल बजाई से मुस्लिम समाज का भला नहीं हो सकता।

 

मुझे छोड़ दे मिरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर 

 

ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मिरा दर्द और बढ़ा न दे

 

 


 



 



 















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